गुरु शिष्य का नाता
गुरु शिष्य का नाता अनमोल हैं गुरु ज्ञान है गुरु प्रकाश हैं गुरु ही आध्यत्म में जीवन का आधार हैं गुरु हो तो जीवन अनमोल हो ही जायेगा,गुरु के स्नेह की एक किरण अंहद के सुषुप्त में परमात्मा की दिव्य ज्योति को जगाने में सहायक मार्ग दर्शक सचेतक हैं गुरु का स्नेह और दीक्षा का ज्ञान मार्ग दर्शन मिलता रहे तो कुछ है जीवन मे जो असम्भव हो,आपकी देह मे क्या नही,पर हमारा प्रयास सार्थक नही होता क्यो क्योंकि कभी अभ्यास लग्न, स्नेह, करूणा की कमी है इसलिए प्रयास विफल होता हैं प्रकृति, ब्रह्मांड, परम् ज्ञान क्या नही जो आपके पास नही,पर वही बात प्रयास मे स्वयं पर विश्वास नही,गुरु मार्ग दर्शक मात्र है हर प्रयास आपका नही होगा हा विस्वास में वास हो हर सांस में उपयुक्त प्रयास हो, गुरु कृपा ही केवलम, गुरु कृपा ही केवलम का सार्थक विस्वास आपकी ढाल का काम करेगी अगर ऐसा हो गया तो फिर क्या है जो आप नही समझ सकते, स्वामी हरिहर जी ने प्रथम 15 वर्षो से किसी को दीक्षा नही दी 50 हजार लोगों को जोड़ने के पश्चात नए साधक नही जोड़े गए कुछ भाग्यवान ही थे जिन्हें 2000 के बाद दीक्षा मिली हो,या कोई दूसरे पाये दान पर साधना पथ को बढ़ाया गया ऐसा नही की कोई योग्य नहीँ था पर गुरु की कृपा गुरि जी ही जाने,सहज नही है राह पनघट की, कोई कोई ही भरता अंहद से ब्रह्म ज्ञान की मटकी,आपने कहते है आप अपनी साधना को 14 वर्ष के लिये बन्धन युक्त रखेंगे,आपने 14 वर्ष का बन का समय ग्रहस्थ में समाज सेवा के रूप मे आरम्भ कर दिया,आपने के कहा अगले ब्रह्म सन्देश तक सब मौन में वास हो,12 दिसम्बर 2018 से आपने अपनी पहचान स्वामी हरिहर को पुनः साधको और शिष्य के बीच में प्रकाशित कर दी औऱ साधको से कहा जागो ब्रह्म बेला आ गई रुद्र पूर्व मे उदय हुए आओ अंह द को समझे सुसुष्पत का भेदन करै, अब वह समय आ गया पूज्यपाद जी ने दीक्षित का मार्ग प्रदान करना आरम्भ किया जो अंह द योग द्वारा अंह द का भेदन कर ब्रह्म से मिलना सहज कर दे गी, सात पायेदान के लिये सात दीक्षा का क्रम आरम्भ होगा,
कैसा है सात पायेदान की दीक्षा
1.सामान्य दीक्षा
2.चेतन दीक्षा
3.चैतन्य दीक्षा
4.हरदा भेदन दीक्षा
5.त्रिनेत्रा उज्वला दीक्षा
6.समाधि योग दीक्षा
7.ब्रह्म योजन दीक्षा
Thursday, March 21, 2019
जीवन का सही मार्ग-अंहदयोग
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