प्रथम पाँच यौगिक क्रियाये
पहले अपने आस-पास के वातावरण को शांत कर ले
हो सके तो भूमि पर आसन लगाये तथा कोई हल्का संगीत लगाये
यौगिक क्रिया करने से पहले बाये हाथ को धरती पर रखै दायिनै हाथ को अपने सर पर रखै और देखें की आपका ब्रह्मरन्ध्र (सर) क्या गर्म हैं
यदि हाँ तो प्रार्थना करें
हे प्रभु मेरे मस्तिक की उलझनों को को मिटाओ मुझे तनाव मुक्त करो , मेरे जीवन की बाधाओ को हरो मुझे रोग मुक्त करो
मुझे शारीरिक ,मानसिक शांति प्रदान करो
साँस कर्म :-अपनी दोनों आँखों को धीरे-धीरे बन्द करे , पांच बार अंदर बाहर धीरे धीरे लम्बी लम्बी साँस ले सांसो पर ध्यान लगाये
आँखै खोले पुनः बाये हाथ को धरती पर तथा दाये हाथ को सर पर रखै
प्रार्थना करे हे माँ धरती दैवी मेरे शरीर से निकलने वाली तामसिक ऊर्जा को शांत करे हमें सात्विक ऊर्जा प्रदान करे
1.प्राणवायु सूत्र :-दोनों हाथो की कनिष्ठा तथा अनामिका अंगुलियो के अग्रभाग को अंगूठे के अग्रभाग से मिलाये
साँस कर्म पहले की तरह हो ,
अब इसी मुद्रा द्वारा नाभिं से दो अंगुल नीचे धीरे धीरे दवाब दे तथा उसे ऊपर की और धकेले यह कार्य हल्के हल्के झटके से करे
ऐनिमेशन न.1
2.आपन वायु सूत्र:- दोनों हाथो की मध्यमा तथा अनामिका अंगुलियो को अंगूठे के अग्रभाग से लगा दे साँस कर्म पूर्व की तरह ही हो इस बार दाये हाथ के अंगूठे को मुद्रा सहित नाभी पर रखै बाये हाथ की मुद्रा सहित कनिष्ठ का व तर्जनी अंगुली को अपनी दोनों आँखों पर रखै अपने भीतर सांसो के साथ भीतर उतरने का प्रयास करे
3.समानवायु सूत्र:-दोनों हाथो की कनिष्ठा अंगुली को अंगूठे से लगा कर मिलाये साँस कर्म पूर्व की तरह हो इसी मुद्रा को करते हुए दाये हाथ को ह्रदय पर रखै तथा बाये हाथ से नाभि पर दाब दे पांच बार अंदर बाहर धीरे धीरे लम्बी साँस ले अपनी आँखों को बन्द ही रखै अपने भीतर उतरने का का प्रयास जारी रहे तथा अपनी सांसो को सुनने का प्रयत्न करे
4.व्यान वायु सूत्र:-दोनों हाथो के अंगूठे को तर्जनी अंगुली के सिरे पर लगा दे शेष तीनो अंगुलियो को सीधी रहेगी अब दाये हाथ से मुद्रा को मिला कर अपनी दोनों आँखों के मध्य (त्रिनेत्र पर रखै) सांसो की क्रिया बैसे ही हो मुद्रा से त्रिनेत्र पर पञ्च बार बाये और फिर दाये घुमाये और देखै आपको कौन सा रंग अनुभव हो रहा हैं दूसरे हाथ की मुद्रा आकाश की तरफ हो
पहले अपने आस-पास के वातावरण को शांत कर ले
हो सके तो भूमि पर आसन लगाये तथा कोई हल्का संगीत लगाये
यौगिक क्रिया करने से पहले बाये हाथ को धरती पर रखै दायिनै हाथ को अपने सर पर रखै और देखें की आपका ब्रह्मरन्ध्र (सर) क्या गर्म हैं
यदि हाँ तो प्रार्थना करें
हे प्रभु मेरे मस्तिक की उलझनों को को मिटाओ मुझे तनाव मुक्त करो , मेरे जीवन की बाधाओ को हरो मुझे रोग मुक्त करो
मुझे शारीरिक ,मानसिक शांति प्रदान करो
साँस कर्म :-अपनी दोनों आँखों को धीरे-धीरे बन्द करे , पांच बार अंदर बाहर धीरे धीरे लम्बी लम्बी साँस ले सांसो पर ध्यान लगाये
आँखै खोले पुनः बाये हाथ को धरती पर तथा दाये हाथ को सर पर रखै
प्रार्थना करे हे माँ धरती दैवी मेरे शरीर से निकलने वाली तामसिक ऊर्जा को शांत करे हमें सात्विक ऊर्जा प्रदान करे
1.प्राणवायु सूत्र :-दोनों हाथो की कनिष्ठा तथा अनामिका अंगुलियो के अग्रभाग को अंगूठे के अग्रभाग से मिलाये
साँस कर्म पहले की तरह हो ,
अब इसी मुद्रा द्वारा नाभिं से दो अंगुल नीचे धीरे धीरे दवाब दे तथा उसे ऊपर की और धकेले यह कार्य हल्के हल्के झटके से करे
ऐनिमेशन न.1
2.आपन वायु सूत्र:- दोनों हाथो की मध्यमा तथा अनामिका अंगुलियो को अंगूठे के अग्रभाग से लगा दे साँस कर्म पूर्व की तरह ही हो इस बार दाये हाथ के अंगूठे को मुद्रा सहित नाभी पर रखै बाये हाथ की मुद्रा सहित कनिष्ठ का व तर्जनी अंगुली को अपनी दोनों आँखों पर रखै अपने भीतर सांसो के साथ भीतर उतरने का प्रयास करे
3.समानवायु सूत्र:-दोनों हाथो की कनिष्ठा अंगुली को अंगूठे से लगा कर मिलाये साँस कर्म पूर्व की तरह हो इसी मुद्रा को करते हुए दाये हाथ को ह्रदय पर रखै तथा बाये हाथ से नाभि पर दाब दे पांच बार अंदर बाहर धीरे धीरे लम्बी साँस ले अपनी आँखों को बन्द ही रखै अपने भीतर उतरने का का प्रयास जारी रहे तथा अपनी सांसो को सुनने का प्रयत्न करे
4.व्यान वायु सूत्र:-दोनों हाथो के अंगूठे को तर्जनी अंगुली के सिरे पर लगा दे शेष तीनो अंगुलियो को सीधी रहेगी अब दाये हाथ से मुद्रा को मिला कर अपनी दोनों आँखों के मध्य (त्रिनेत्र पर रखै) सांसो की क्रिया बैसे ही हो मुद्रा से त्रिनेत्र पर पञ्च बार बाये और फिर दाये घुमाये और देखै आपको कौन सा रंग अनुभव हो रहा हैं दूसरे हाथ की मुद्रा आकाश की तरफ हो

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